02 मार्च 2015

वसंत बहार - होली की फुहार


हर तरफ रंगों की रंगोली है,
मन में ख़ुशी की लहर,
और दिल में प्रसन्नता की डोली है। 

प्रकृति के असंख्य रंग,
खिलें हैं हर्ष के संग,
और उड़ रहा है मन हवा के संग। 

पंछियों का कोलाहल,
एक मधुर राग है,
चहुँ ओर छाया रंग है,चाहे आकाश हो या भूतल। 

खो जाऊं इन रंगों में, 
वसंत की फुहारों में,
कहीं झूलें, तो कहीं ठिठोली,
यही तो है खुशियों की होली। 




होली के रंग कान्हा के संग

वृन्दावन की गलियों में,
रंग- बिरंगी कलियों में,
गूंजे तुम्हारी बांसुरी,
हे! कान्हा तुम्हारे नाम की मैं बाँवरी। 

होली यह जो आई है,
रंगों की फुहार लाई है,
तेरे रंग में रंगने को, 
हे! कान्हा मन में लगन समाई है।




हर रंग में सुर तुम्हारा समाया है,
कठिन वक्त में तुमने ही तो दिया सहारा है,
होली के लाल गुलाल सा,
हे! कान्हा तेरा रूप है विशाल सा। 

आज रंग जाऊंगी रंगो में,
छनकती हुई तरंगो में,
हर बुराई मिट जाएगी,
हे! कान्हा यह दुनिया तेरे रंग में निखर जाएगी।  
 
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