19 मई 2014

तू बस अडिग चल

जब बादल घनघोर बरसें
जल मग्न हो समग्र भूतल ,
तू बस अडिग चल, अडिग चल, अडिग चल।

ज्यूँ मछली तैरे हर बार ,
ले सीख उसकी यह पतवार
हो जाएंगे सैंकड़ो समुद्र पार। 
तू बस अडिग चल अडिग चल, अडिग चल।

हो तेज हवा की गर्जना,
कांपें सृष्टि थर्र - थर्र,
तू बस अडिग चल अडिग चल, अडिग चल।

फैला अपने पंख चहुँ ओर,
ले चूम नील गगन
बुलंदियां भी तुझमें होंगी मगन,
तू बस अडिग चल, अडिग चल, अडिग चल।

जीर्ण हो पृथवी का सीना,
अग्नि उगले पर्वत अनंत ,
तू बस अडिग चल अडिग चल, अडिग चल।

मन को सशक्त कर,
सारी बाधाएं हो जाएँगी हल,
तू बस अडिग चल अडिग चल, अडिग चल।

14 मई 2014

प्रकृति की गोद

मंद - मंद हवा का  झौंका ,
नदिया में बहती नौका ,
प्रकृति के ये अनुपम दृश्य ,
मन को हर्षाते सदृश्य l 


चिड़ियों का चहचहाना ,
फूलों का मुस्कुराना ,
महकाते जीवन का आँगन ,
खुशियाँ  लाते हर प्रांगण l 


कल - कल करता झरना ,
जाने सब को हरना ,
समायें हर कण में,
प्राण वायु सा हर प्रण मेँ l 


पर्वतों का गीत गूंजे चहुँ ओर ,
सब को खींचे जैसे एक डोर ,
हर रात , हर भोर, 
अद्धभुत राग गुनगुनाती - 
प्रकृति की गोद l 

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