25 नवंबर 2013

इक सर्द सुबह


भीनी-भीनी सी खुशबू लिए,
अनगिनत किरणों के जलते दीये ,
मीठा राग गुनगुनाती,
इक सर्द सुबह l 

सफ़ेद आँचल सा लहरा,
अथाह व्योम और सागर गहरा,
छंद - पंक्तियाँ लिखती ,
इक  सर्द सुबह l

पथिक को राह  दिखाती ,
कभी चुप और कभी इतराती,
बस यूँही मुस्कुराती,
इक  सर्द सुबह l 

02 नवंबर 2013

महक


मेरी कविताओं को ,
बिखरने दो हवाओं में ,
शायद तुम तक इनकी महक पहुंचे l
हर पंक्ति को, पंखुरी  समान,
बिछ जाने  दो राहों में,
शायद तुम गुज़रो वहाँ से l 

शब्दों कि गहराई से,
बना यह अथाह सागर,
तुम हो अनमोल मोती l 

यह अनुरोध है मेरा,
थाम लो इस हाथ को,
शायद फिर मेरी कलम से,
शब्दों का समर्पण हो  न  हो l 



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